Friday, 12 August 2022

खालीपन....

खालीपन....

खालीपन मन का
अकथनीय
हलक में 
कुछ अटका सा
जुबान पर
कुछ रुका सा
दिल में
कुछ चुभता सा
दिमाग में
कुछ छाया सा
आँखों में
कुछ छुपा सा
सपनों को
कुछ रौँधता सा
बेड़ियों में
कुछ जकड़ा सा 
असमंजस में
कुछ घिरा सा
अस्तित्व पर
हावी सा
कोशिश फिर भी
सँभलने का
पहेलियों से
झूज़ने का
सहारा लेकर
तिंको का
मंज़िलों को
फिर पाने का
आँसूओं को
पीकर के 
खालीपन से
उठने का
मुस्कुराते हुए मन से 
जीवन सार्थक करने का... 

मन विमल 

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