अंधेरे के पार उजाला बड़ा है...
आज क्यों दिल धड़कता है खामोशी में,
जैसे सवाल कोई, दिल की गहराइयों में।
भले ही धड़कन हमारे दिल की पहचान है,
कभी धुन खुशी की ,कभी दर्द की उड़ान है।
कभी बन कर के गीत जीवन को सजाती है,
कभी अनजाने डर की आहट सुनाती है।
कभी उम्मीद की लौ बन दिल को जलाती है,
कभी चिंताओं की रातों में चुपचाप समाती है।
कुछ धड़कनें हँसी की तरह हल्की लगती है,
कुछ धड़कनें ख़ामोशी से भारी बनतीं है।
कभी लगता है थम जाए धड़कन इसी पल,
और रुक जाये बेचैनी की यह कलकल
फिर उसी से मिल जाता जीने का संबल।
पलता उसी में ही उम्मीदों का एक पल
दिल है तो धड़कन है, रीत उसकी यही है
और रुक जाये गर तो दुनिया नहीं है
सच हर धड़कन में छुपा संदेश यही है
अँधेरा चाहे जितना हो, सवेरा दूर नहीं है।
तो मुस्कराकर के जियो, ग़म में क्या रखा हैं
क्योंकि अंधेरे के पार उजाला बड़ा हैं...
मन विमल
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