Wednesday, 11 February 2026

पियूष बन जाए विष फिर भी रचूँगी कमाल...


पियूष बन जाए विष फिर भी रचूँगी कमाल...

कवी हूँ मैं
AI से परे
भावनाओं से घिरे
कभी उल्लास से भरे
कभी उलझनों से डरे
कभी आंसुओं के भंवर में
कभी मुस्कानों से सजे
कभी दर्द में कराहते
कभी सिसकियों में बहे
यंत्र नहीं हूँ
ना यंत्रों से रची
शायद इस लिए कुछ घबराती
तकनीकी जादू जब देखती
पल में रचे जाते शब्दों के महल
पर मेरी कलम में कहाँ वो पहल
जो संघर्ष, पीड़ा से उथल-पुथल
जीते जी धड़कता हर पल
अनुभव के रस शब्दों में घोल
भटकती, सोचती, उलझती रहती
शायद यही मेरी कमज़ोरी
या मेरी सब से बड़ी ताकत
धीमी हूँ, अधूरी हूँ,
पर सच्ची हूँ—
मानवी हूँ…
और यही मेरी खासियत
यंत्र नहीं हूँ मैं।
मेरे शब्द बेजान नहीं,
मेरे घावों की रौशनी हैं।
मेरी हर पंक्ति में
एक अधूरा दिन सोता है,
एक टूटी शाम जगती है,
एक दबी हुई चीख...
धीरे-धीरे जो भाषा बनती है।
यंत्र तुरंत उत्तर दे देता ,
पर मैं…
मैं उत्तर कहाँ दे पाती ?
इस लिए शायद उलझती
कभी भटकती ,कभी गिरती
कभी संभलती और रुकती
पर कभी ना हारती
मानव हूं...मानवी..
हृदय और बुद्धि की बेजोड़ मिसाल,
पियूष बन जाए विष फिर भी रचूँगी कमाल।

मन विमल 

No comments:

Post a Comment

Standing Tall for Maharashtra : On Maharashtra Day - A Life Given to This Land -Thirty-Three Years and Counting : जय महाराष्ट्र

Standing Tall for Maharashtra : On Maharashtra Day -  A Life Given to This Land -Thirty-Three Years and Counting : जय महाराष्ट्र  This mor...