Sunday, 21 August 2022

पूर्णत्व...

पूर्णत्व ...

अपनों के साथ होने का...
बैठकर बातें करने का...
बेझिज़क कुछ भी कहने का...
खिलखिलाकर हसने का...
कच्चे पक्के व्यंजन खाने का...
पुरानी तस्वीरें देखने का...
हसीन यादों को फिर जीने का...
दिल का बोझ हल्का करने का...
हाथों में हाथ लिए चलने का...
कांधे पर सर रखने का...
चैन से फिर सोने का...
मुस्कुराकर जीवन जीने का...
सच और साहस मन में रखने का...
विश्वास कभी ना खोने का...
संकल्पित रहने का...
दृढ़ता से साथ निभाने का...
यही तो हैँ पूर्णत्व 🌹

मन विमल

7 comments:

  1. जब भी हॉस्टल से घर की ओर प्रस्थान करते थे तब पंकज उदास जी की 'चिट्ठी आयी हैं वतन से चिट्ठी आयी हैं' यह गीत गुणगुणाते थे। आपकी पुर्णत्व की यह सिर्फ कविता ही नहीं है। बल्कि एक यादें हैं कुटुंब, लोग, प्रेम बंधन, त्योहार, संस्कृति, व्यंजन और पदार्थ की।

    ReplyDelete
    Replies
    1. सच अपनों का साथ बहुत सुखद होता हैँ...

      Delete
  2. Respected madam बहोतही अच्छी कविता लिखी है आपणे आज के युग हे हम सब अपने
    कामकाज की वजहसे अपनो हे दुर हो चुके हैं जादा समय अपणे परिजनोकों नही दे पाते हैं. कविता पढकर अपनो के साथ होणेसे जो पूर्णत्व प्राप्त होतात हैं उसमे परमानंद होता हैं...🙏

    ReplyDelete
  3. Very nice poem. Home sweet Home always

    ReplyDelete

THE MAN WHO HID HIS TEARS TO MAKE OTHERS LAUGHPadma Shri for Shri Raghuveer Khedkar and the need to Save Tamasha, Maharashtra's Dying Folk Art

THE MAN WHO HID HIS TEARS TO MAKE OTHERS LAUGH Padma Shri for Shri Raghuveer Khedkar and the need to Save Tamasha, Maharashtra's Dying F...